बेपरवाह बाबा जी
जीवन परिचय
गोस्वामी गुरुदास जी महाराज की कहानी एक बड़े भाई की जिम्मेदारी से आरम्भ होती है। स्वामी रामतीर्थ जी महाराज बहुत छोटे थे जब उनकी माता का निधन हो गया। घर में आई इस रिक्तता के बीच गुरुदास जी महाराज और परिवार की एक वृद्ध बुआ ने बालक को संभाला। गुरुदास जी महाराज का स्थान इसलिए केवल बड़े भाई का नहीं, उस संरक्षक का भी है जिसने भविष्य के महान संत के बचपन को सहारा दिया।
परिवार के साधन सीमित थे और शिक्षा का मार्ग सरल नहीं था। तीर्थ राम जी महाराज की असाधारण प्रतिभा के पीछे घर की रोजमर्रा की देखभाल और संबंधों की वह जमीन थी जिसे गुरुदास जी महाराज ने स्थिर बनाए रखा। उनका जीवन उस मौन सेवा का उदाहरण है जो किसी प्रतिभाशाली बालक को अपनी क्षमता तक पहुँचने का अवसर देती है।
गुरुदास जी महाराज को परिवार में बेपरवाह बाबा के नाम से भी स्मरण किया जाता है। उनके व्यक्तित्व की सबसे उजली छवि घर के भीतर निभाए गए उत्तरदायित्व में दिखाई देती है। उन्होंने छोटे भाई को सुरक्षा, अपनापन और आगे बढ़ने की जगह दी।
गुरु परम्परा में गुरुदास जी महाराज और रामतीर्थ जी महाराज के नाम अलग-अलग स्थानों पर आते हैं, लेकिन जीवन में वे सगे भाई और निकट परिवारजन थे। गुरुदास जी महाराज की कथा दिखाती है कि आध्यात्मिक परम्परा केवल उपदेशों से नहीं बनती; वह पालन, सेवा और पारिवारिक उत्तरदायित्व से भी आकार लेती है।