श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून

गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज

गुरु परम्परा
क्रम: 01 / 34

रचयिता — रामचरित्र मानस, हनुमान चालीसा, विनय पत्रिका, गीतावल, कवितावली, दोहावली इत्यादि

रामायण मन्दिर की गुरु-शिष्य परम्परा के मूल आदि गुरु। इनका सम्पूर्ण कथात्मक जीवन-परिचय — जन्म, बाल्यकाल, विवाह, वैराग्य, हनुमान जी का साक्षात्कार, श्रीरामचरितमानस एवं विनयपत्रिका की रचना, काशी की घटनायें, महाप्रयाण — "तुलसी चरित" में विस्तार से वर्णित है। हनुमान चालीसा जैसे सुप्रसिद्ध पाठ की रचना भी स्वयं गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज द्वारा की गई (देखें "पाठ" पृष्ठ)।
सम्पूर्ण तुलसी चरित (28 अध्याय) पढ़ें →

जीवन परिचय

गोसाईं परिवार की पुरानी स्मृति में गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज उस आध्यात्मिक परम्परा के आदिपुरुष के रूप में उपस्थित हैं, जिससे आगे चलकर स्वामी रामतीर्थ जी महाराज का परिवार जुड़ा। उनका नाम मर्दान क्षेत्र के गढ़ी कपुरा से जुड़ता है। परिवार के लिए वे केवल पूज्य संत नहीं, बल्कि पुरखों, पुराने धार्मिक घर और अपनी जड़ों की पहचान बन गए।

विभाजन से पहले गढ़ी कपुरा में हिन्दू और सिख परिवारों का एक जीवंत संसार था। मंदिर, बाजार, घर और साधुओं की बैठकें सामाजिक तथा धार्मिक जीवन को जोड़ती थीं। इसी वातावरण में तुलसीदास जी महाराज की स्मृति पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती रही और बाद में दूर बसे परिवारों के लिए भी अपने मूल स्थान की पहचान बनी रही।

समय के साथ उनके जीवन के दैनिक प्रसंग धुँधले पड़ गए, लेकिन उनका नाम सीमाओं और पीढ़ियों के पार चला आया। गुरु परम्परा में उनका स्थान उस प्राचीन जड़ का है, जिससे परिवार ने अपनी आध्यात्मिक यात्रा को आरम्भ मानकर सुरक्षित रखा।