श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
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तुलसी दास गुरु की बड़ी शान है, जान उनमें हमारी कुरवान है।

तुलसी दास गुरु की बड़ी शान है, जान उनमें हमारी कुरवान है।

जिसने लिखी श्री राम की लीला, मेरे सतगुरु की यही पहचान है।

01– सुन्दर नैना तिलक विशाला, मुख पर सुन्दर है लाली।

चाँद-सितारे हैं सब तुझपे रोशन, और सब पे तेरा एहसान है।

02– निर्धन को धनवान, निर्बल को बलवान। दुखियों के दुःख दूर करे तूँ सबका है भगवान।

तेरे हाथों में मेरी अब लाज है हर मुश्किल को किया आसान है।

03– तुझ बिन कौन हमारे दिल का दर्द यहाँ पर बाँटे।

जीवन के हर मोड़ पे बिखरे लाख दुखों के काँटे।

हमको दे दो ये भिक्षा दया की, हम बालक तेरे अन्जान हैं।