श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
आरती

गोविन्द मेरी यह प्रार्थना है

गोविन्द मेरी यह प्रार्थना है गोपाल मेरी यह प्रार्थना है

भूलूँ न मैं नाम कभी भी तुम्हारा

निष्काम होके दिन रात गाऊँ, गोविन्द दामोदर माधवेति।

1. देहान्त काले तुम सामने हो बन्सी बजाते मन को लुभाते

गाता यही मैं तन नाथ त्यागूं, गोविन्द दामोदर माधवेति।

2. माता यशोदा हरि को जगावे, जागो उठो मोहन अब नैन खोलो

द्वारे खड़े गोप बुला रहे हैं, गोविन्द दामोदर माधवेति।

3. जागे पुजारी हरि मन्दिरों में, जागो जगाते अपने प्रभु को

हे शील सिंधु अब नेत्र खोलो, गोविन्द दामोदर माधवेति।

4. कोई नवेली पति को जगाये प्राणेश जागो अब नींद त्यागो

बेला यही है हरि गीत गावो, गोविन्द दामोदर माधवेति।

5. प्यारे जरा तो मन में विचारो, क्या साथ लाये क्या ले चलोगे

जाये सदा संग यह ही तुम्हारे, गोविन्द दामोदर माधवेति।

6. नारी धरा धाम सौ पुत्र प्यारे सद मित्र सदबान्धव सब सारे

कोई न साथी हरि को पुकारे, गोविन्द दामोदर माधवेति।

7. नाता भला क्या जग से हमारा, आये यहाँ और कर क्या रहे हो

सोचो विचारो हरि को पुकारो, गोविन्द दामोदर माधवेति।

8. सच्चे सखा हैं हरि ही हमारे, माता-पिता शील सब बन्धु प्यारे

भूलो न भाइयों दिन रात गाओ, गोविन्द दामोदर माधवेति।

श्री राधे, श्री कृष्ण, जी अब है मेरी बार,

दास जान निज शील को, सुनिए प्रेमी पुकार।

दास अटके मंझदार में, हो भवसागर पार,

क्यों अटके मंझदार में, हो भवसागर पार।।

शील पढ़े जो भाव से, निशदिन प्रेम पुकार।।